{"product_id":"अतितहीन-अनागत-by-डॉ-दिनकर-जोशी","title":"Atithin Anagat by Dr Dinkar Joshi | अतितहीन अनागत - डॉ.दिनकर जोशी","description":"\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eलेव निकोलोयेविच यही सही नाम - मूल नाम - असली नाम, लेकिन इतना उच्चारण करेंगे तो बड़े-बड़े पढ़े-लिखे एवं स्वयं को साहित्य-रसिक ही नहीं, परंतु मर्मज्ञ माननेवाले और मनवानेवाले अनेक को यह नाम एकदम अपरिचित लगेगा। काउन्ट लिओ टॉल्सटाय - यदि इतना ही उच्चारण करेंगे तो रसिक एवं मर्मज्ञ ही नहीं, विद्यार्थी एवं निपट पाठकों के कान भी खड़े हो जाएँगे। इस नाम से वे परिचित होंगे। इन तीन शब्दों में ‘काउन्ट’ नाम नहीं है। रूस के झार की ओर से उनके पूर्वजों को दिया गया एक खिताब है। मूल नाम ‘लेव’ परंतु व्यवहार में ‘लिओ’ हो गया, इसका सही कारण शायद स्वयं लेव ने वयस्क होने के पश्चात् अपने हस्ताक्षर में अधिकांश ‘Leo’ किया है और कहीं-कहीं ‘Lev’ भी किया है, यह है। इसलिए वह ‘Lev’ पीछे धकेल दिया गया होने की संभावना है। अंतिम शेष शब्द ‘टॉल्सटाय’ व्यक्ति के नाम का हिस्सा नहीं है, परंतु पारिवारिक पहचान है, कुल या कुटुंब का परिचय है, जैसे गांधी या नेहरू लिखा जाता है वैसे ही यह टॉल्सटाय।\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eटॉल्सटाय का जीवन-काल सन् 1828 से सन् 1910 था। उन्होंने पुष्कल लिखा और वह सब अनेक भाषाओं में अनूदित हुआ है। अपनी उपस्थिति में ही टॉल्सटाय ने अपने साहित्य का स्वत्वाधिकार या तो किसी को दे दिया था अथवा उन्हें स्वत्वाधिकार मुक्त कर दिया था। उनकी पारिवारिक परिस्थिति एवं जिसके विषय में इसके पश्चात् हम जो बात करेंगे, इसके फलस्वरूप स्वत्वाधिकारहीन ये पुस्तकें मानो धनी-धोरी\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eहीन हो गयीं। असंख्य प्रकाशकों ने केवल व्यापारी दृष्टि से भिन्न-भिन्न संपादकों ने जो लिखा या लिखवाया वह सब छाप दिया। पारिवारिक कलह के कारण पत्नी एवं संतानों ने भी अपने संस्मरणों के नाम पर टॉल्सटाय विषयक पुस्तकों की रचना की। इनमें पिता टॉल्सटाय की तरफदार संतानें सर्गीयेन्को, माशा एवं साशा एक ओर हैं, तो पति से विमुख पत्नी सोफिया और माता का तरफदार बेटा एन्ड्री कुछ बेतुकी बात ही करते हैं।\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eऐसा घटित होने के कारण, एकदूसरे का समूचा छेदन कर दे ऐसी घटनाएँ टॉल्सटाय-विषयक ग्रंथों में से प्राप्त होती हैं। टॉल्सटाय जब दो साल के थे तब उनकी माता एवं जब वे आठ-नौ साल के थे तब उनके पिता की मृत्यु हुई थी ऐसे स्पष्ट विधान अनेक ग्रंथों से प्राप्त होते हैं। फिर भी इस आधार-स्वरूप हकीकत का छेदन कर दे, इस प्रकार के वर्णन स्वयं टॉल्सटाय द्वारा लिखित दैनिकी रूपी ग्रंथों से प्राप्त होते हैं। ‘Childhood, Boyhood and Youth’ टॉल्सटाय की दैनिकी कही जाती है, परंतु इसमें टॉल्सटाय एवं उनकी माता के संवाद तथा पिता के पुनर्विवाह विषयक घटना विषयक चर्चा का आलेखन हुआ है। यह कैसे संभव है?\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eप्रथम दृष्टि से तो यही लगता है कि टॉल्सटाय ने स्वयं जो लिखा है उसी को अंतिम मान लेना चाहिए, परंतु स्थिति यह है कि इन दैनिकियों को भी भिन्न-भिन्न संपादकों ने समयांतर में प्रकाशित करवायी हैं और इसमें भी टॉल्सटाय की तरफदारी करनेवाली एवं उनकी पत्नी की तरफदारी करनेवाली पूर्व निर्धारित अवधारणाओं का आलेखन किया गया है।\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eयह तो केवल एक उदाहरण है। ऐसे विरोधी कथानक, संवाद, पात्र इत्यादि के उल्लेख बहुतायत मात्रा में प्राप्त होते हैं। जीवनकथात्मक उपन्यास का आलेखन करनेवाले को इस अटवी से गुजर होता है और उसमें से\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eआत्मकथात्मक दैनिकी एवं उपन्यास \u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eव्यावसायिक प्रकाशन एवं संपादन भेद \u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपरस्पर विरोधी ऐतिहासिक स्रोत\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eजीवनकथात्मक उपन्यास लेखन \u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eसंस्मरणों में तथ्य बनाम कल्पना\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"Tbooks","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50284206424291,"sku":"978-81-686465-9-9","price":599.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0789\/1258\/5955\/files\/WhatsAppImage2026-09-17at3.15.03PM.jpg?v=1790250244","url":"https:\/\/tbooks.live\/products\/%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%a4-by-%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a5%80","provider":"Tbooks","version":"1.0","type":"link"}